Uttarakhand

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय मानक ब्यूरो के 79वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में किया प्रतिभाग

मुख्यमंत्री बोले — गुणवत्ता को केवल मानक नहीं, बल्कि आदत बनाना जरूरी; “हाउस ऑफ हिमालयाज” ब्रांड से स्थानीय उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान

देहरादून, 07 जनवरी 2025 (सू. ब्यूरो)
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के 79वें स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गुणवत्ता आधारित संस्कृति को बढ़ावा देना आज की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो ने बीते आठ दशकों में गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए “गुणवत्ता ही पहचान” के मंत्र को साकार किया है। वर्ष 1947 में स्थापित यह संस्था अब देश की औद्योगिक, वैज्ञानिक और आर्थिक प्रगति की मजबूत नींव बन चुकी है।

श्री धामी ने कहा कि बीआईएस द्वारा मानकीकरण, प्रमाणीकरण और गुणवत्ता परीक्षण के माध्यम से उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाया गया है और उपभोक्ताओं में भरोसे की भावना को मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि अब मानकीकरण का दायरा केवल उद्योग जगत तक सीमित नहीं, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य, सड़क सुरक्षा, ऊर्जा, जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन और डिजिटल सेवाओं तक फैल चुका है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बीआईएस द्वारा डिजिटल सुरक्षा, मेडिकल डिवाइस, ड्रोन, इलेक्ट्रिक वाहन, रिसाइकिल सामग्री और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में समयानुकूल मानक तय कर भविष्य की दिशा तय की जा रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” जैसे अभियान देश की आर्थिक और तकनीकी प्रगति के आधार स्तंभ हैं। बीआईएस “वन नेशन, वन स्टैंडर्ड” नीति के तहत भारत को वैश्विक गुणवत्ता मानकों की प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों — हस्तशिल्प, जैविक कृषि उत्पाद, औषधीय जड़ी-बूटियाँ और पारंपरिक खाद्य उत्पादों — की गुणवत्ता को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए “हाउस ऑफ हिमालयाज” ब्रांड की स्थापना की गई है।

उन्होंने कहा कि राज्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। राज्य में पहली बार विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति 2025 लागू की गई है। 13 जनपदों के 95 ब्लॉकों में 180 से अधिक STEM आधारित प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं। साथ ही, साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग, लैब-ऑन-व्हील्स, पेटेंट सूचना केंद्र और सीमांत क्षेत्र विकास परिषद जैसी पहलें भी चलाई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में बनने वाली देश की पाँचवीं साइंस सिटी का निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। यह परियोजना केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से ₹175 करोड़ की लागत से तैयार हो रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि सिलक्यारा सुरंग रेस्क्यू अभियान में अपनाए गए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है, जिस पर आधारित विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम में विधायक खजान दास, उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, निदेशक बीआईएस सौरभ तिवारी, महानिदेशक यू-कॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, ब्रिगेडियर के.जी. बहल (सेनि) तथा उद्योग एवं व्यापार संघ के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

— सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग

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