Uttarakhand

सेलाकुई के बाद अब मोहब्बेवाला में बवाल, विंडलास फैक्ट्री के कर्मचारियों ने खोला मोर्चा

देहरादून:

उत्तराखंड की औद्योगिक बेल्ट में चल रहा श्रमिक आंदोलन अब और ज्यादा आक्रामक होता जा रहा है। सेलाकुई की फैक्ट्रियों में पिछले कई दिनों से जारी बवाल के बाद, अब यह चिंगारी देहरादून के मोहब्बेवाला तक पहुंच गई है। मोहब्बेवाला स्थित प्रसिद्ध ‘विंडलास न्यूट्रिशन फैक्ट्री’ के सैकड़ों कर्मचारियों ने रविवार 17 मई को वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर फैक्ट्री के बाहर मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष कर्मचारी शामिल हैं, जो अपनी न्यूनतम सैलरी ₹20,000 करने की मांग पर अड़े हैं।

ओवर टाइम और उत्पीड़न का आरोप, कर्मचारियों ने बयां किया दर्द

रविवार सुबह से ही विंडलास न्यूट्रिशन के बाहर कर्मचारियों का जमावड़ा शुरू हो गया था। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार की गाइडलाइंस के बावजूद फैक्ट्री प्रबंधन उन्हें ओवरटाइम (Overtime) का अतिरिक्त भुगतान नहीं कर रहा है।

फैक्ट्री में काम करने वाली महिला कर्मचारियों ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि काम के दौरान उन्हें काफी प्रताड़ित किया जाता है और जितनी मेहनत कराई जाती है, उसके मुकाबले बेहद कम सैलरी दी जा रही है।

वेतन का गणित: क्या है कर्मचारियों की मांग?

जानकारी के मुताबिक, इस विंडलास फैक्ट्री में करीब 3500 कर्मचारी काम करते हैं। वर्तमान में इन्हें अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से वेतन दिया जा रहा है:

कैटेगरी 1: ₹10,900 प्रति माह

कैटेगरी 2: ₹12,500 प्रति माहकैटेगरी 3: ₹13,800 प्रति माह

कर्मचारियों का साफ कहना है कि महंगाई के इस दौर में इतने कम वेतन में गुजारा करना नामुमकिन है, इसलिए सभी कैटेगरी का न्यूनतम वेतन ₹20,000 तय किया जाए।

मौके पर भारी पुलिस बल, वार्ता का दौर जारी

औद्योगिक क्षेत्र में तनाव की सूचना मिलते ही देहरादून पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया। पुलिस और फैक्ट्री प्रबंधन ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन कर्मचारी अपनी मांग से टस से मस नहीं हुए।

फिलहाल, स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए फैक्ट्री के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है। वहीं, गतिरोध को सुलझाने के लिए कर्मचारियों के दो प्रतिनिधि फैक्ट्री संचालकों के साथ बंद कमरे में वार्ता कर रहे हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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