Uttarakhand

थराली सीएचसी में जली दवाओं के बाद एक्सपायरी दवाइयों का बड़ा भंडार मिला, जांच समिति ने शुरू की पड़ताल

थराली। चमोली जिले के थराली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी दवाइयों को जलाए जाने के मामले के बाद अब बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयां और मास्क मिलने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी के निर्देश पर गठित जांच समिति ने सोमवार को सीएचसी पहुंचकर मामले की जांच शुरू की।

बताया जा रहा है कि बीते दिनों सीएचसी परिसर में सरकारी दवाइयां जली हुई मिलने का मामला सामने आया था। मामला समाचार पत्रों और सोशल मीडिया में चर्चा में आने के बाद चमोली के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अभिषेक गुप्ता ने जांच के आदेश दिए थे।

मामले की जांच के लिए उप जिला चिकित्सालय कर्णप्रयाग के अधीक्षक भगवती प्रसाद पुरोहित की अध्यक्षता में दो सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति में कर्णप्रयाग चिकित्सालय के चीफ फार्मासिस्ट अनिल मिश्रा को भी शामिल किया गया है।

स्टॉक रजिस्टर और अभिलेखों की जांच

जांच टीम ने थराली सीएचसी पहुंचकर स्टॉक रजिस्टर, दवा वितरण से जुड़े अभिलेखों और अन्य दस्तावेजों की जांच की। टीम ने उस स्थान का भी निरीक्षण किया, जहां कथित रूप से सरकारी दवाइयों को जलाया गया था।

जांच के दौरान अस्पताल परिसर में चिकित्सकों के सरकारी आवास के पास स्थित एक कमरे में बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयां और मास्क दिखाई दिए। टीम ने खिड़की के माध्यम से कमरे की तस्वीरें लीं। हालांकि, जांच के दौरान कमरे का ताला नहीं खुलवाया गया और न ही उसे सील किया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं।

एक सप्ताह में मांगी गई जांच रिपोर्ट

जांच समिति के अध्यक्ष एवं कर्णप्रयाग चिकित्सालय के सीएमएस भगवती प्रसाद पुरोहित ने बताया कि मुख्य चिकित्साधिकारी ने मामले की गंभीरता से जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर जांच समिति दोबारा थराली सीएचसी पहुंचकर दस्तावेजों और मौके से जुड़े सभी तथ्यों की विस्तृत पड़ताल करेगी। जांच रिपोर्ट चमोली के मुख्य चिकित्साधिकारी को सौंपी जाएगी, जिसके बाद विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, जली हुई सरकारी दवाइयों और एक्सपायरी दवाओं के मामले में जांच जारी है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दवाओं के रखरखाव, वितरण और निस्तारण में किस स्तर पर लापरवाही हुई।

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