Uttarakhand

सड़क नहीं, तो डोली ही सहारा: बीमार बुजुर्ग को महिलाओं ने चार किमी पैदल पहुंचाया

गैरसैंण के गोगनाणी गांव की तस्वीर ने खोली सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल, 25 साल से सड़क की मांग

गैरसैंण। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण तहसील के दूरस्थ गांवों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई है। विकासखंड गैरसैंण के कुनीगाड़ क्षेत्र के गोगनाणी गांव में 61 वर्षीय बीमार बलवंत सिंह को ग्रामीण महिलाओं ने डोली में बैठाकर करीब चार किलोमीटर ऊबड़-खाबड़ रास्ते से पैदल सड़क तक पहुंचाया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में सड़क सुविधा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

परिजनों के अनुसार, बलवंत सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रात में अस्पताल ले जाने के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं हो सका। गांव के अधिकांश पुरुष रोजगार के सिलसिले में बाहर रहते हैं। ऐसे में अगले दिन गांव की महिलाओं ने मोर्चा संभाला और बलवंत सिंह को डोली में बैठाकर करीब चार किलोमीटर दूर कोठा बैंड तक पहुंचाया।

इसके बाद नजदीकी गांवों के रिश्तेदार उन्हें चौखुटिया अस्पताल ले गए। परिजनों के मुताबिक, चिकित्सकों ने जांच के बाद हृदय संबंधी समस्या बताते हुए उन्हें बेस अस्पताल अल्मोड़ा रेफर किया। परिजनों का कहना है कि उपचार मिलने में हुई देरी के बाद बलवंत सिंह की मौत हो गई। हालांकि, उनकी मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा।

महिलाओं ने उठाया डोली का भार

बलवंत सिंह गोगनाणी तोक में पत्नी देवकी देवी और छोटे दिव्यांग बेटे के साथ रहते थे। वह पेंटर का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। तबीयत बिगड़ने के बाद जब तत्काल सड़क तक पहुंचाने के लिए कोई साधन नहीं मिला तो गांव की महिलाओं ने उन्हें डोली में बैठाया।

गीता, धन्ना, शांता, कुसमा, छुमा, मंजू, मीना, पूजा, गंगा देवी, पुष्पा देवी, कमला, राधा, दीपा और मधु समेत अन्य महिलाओं ने करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर उन्हें सड़क तक पहुंचाया। महिलाओं का कहना है कि पहाड़ में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को लंबे समय से इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

महिलाओं ने कहा कि “कष्ट उठाना हमारी नियति बन गई है, लेकिन इससे सरकारों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा।”

25 साल से सड़क का इंतजार

गांव के बुजुर्ग धर्म सिंह और दान सिंह का कहना है कि उन्होंने जीवन का अधिकांश हिस्सा सड़क का इंतजार करते हुए गुजारा है। उनका कहना है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी सड़क सुविधा नहीं मिलने से ग्रामीणों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।

बलवंत सिंह के छोटे भाई कैप्टन विक्रम सिंह नेगी के अनुसार, पिछले एक वर्ष में समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण क्षेत्र में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। उनका कहना है कि गांव को सड़क से जोड़ने की मांग करीब 25 वर्षों से की जा रही है, लेकिन अभी तक मामला फाइलों से आगे नहीं बढ़ पाया है।

क्षेत्र के डॉ. झगड़ सिंह का कहना है कि दूरस्थ गांवों में गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती है। उनके मुताबिक, सड़क सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को जल्द स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया जा सकता है।

तीन गांवों की करीब 400 आबादी सड़क से दूर

कुनीगाड़ क्षेत्र के गोगनाणी, दमदड़ और तिमिलपानी गांव चमोली जिले के सीमांत क्षेत्र में स्थित हैं। गोगनाणी में करीब 30, दमदड़ में 10 और तिमिलपानी में लगभग 20 परिवार रहते हैं। तीनों गांवों की कुल आबादी करीब 400 बताई जा रही है।

ग्रामीणों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए दो प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इनमें कोठा से दमदड़ तक करीब चार किलोमीटर सड़क का प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग के पास है। वहीं निगलाणी से ऊपरी गांवों को जोड़ने वाले करीब तीन किलोमीटर मार्ग का प्रस्ताव पीएमजीएसवाई के तहत है।

हालांकि, वन विभाग की स्वीकृति से जुड़े मामलों के कारण सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

संयुक्त निरीक्षण के बाद भी वन स्वीकृति बनी अड़चन

बीती 25 अगस्त को केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग गोपेश्वर के मुख्य वन संरक्षक और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने कोठा-दमदड़ प्रस्तावित सड़क का संयुक्त निरीक्षण किया था। इससे ग्रामीणों को सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद जगी थी।

इसके बाद वन विभाग ने प्रस्तावित सड़क के संबंध में कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताई। विभाग की ओर से प्रस्तावित समरेखण में आने वाले पेड़ों के लिए लगाए गए पिलरों, आरक्षित वन भूमि की स्थिति और मलबा निस्तारण के लिए चयनित स्थलों की जानकारी को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। लोक निर्माण विभाग की ओर से जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर से संबंधित आपत्ति भी दर्ज की गई है।

इससे करीब 25 वर्षों से सड़क की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों की उम्मीदों पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

जल्द दूर होंगी आपत्तियां: लोनिवि

लोक निर्माण विभाग खंड गैरसैंण के अधिशासी अभियंता आशुतोष कुमार ने बताया कि वन विभाग के साथ संयुक्त सर्वे के बाद कुछ बिंदुओं पर आपत्तियां मिली हैं। उन्होंने कहा कि आपत्तियों के समाधान के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद कर ली गई है और जल्द ही उनका निस्तारण कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

आशुतोष कुमार, अधिशासी अभियंता, लोनिवि खंड गैरसैंण

वहीं, उप वन संरक्षक केदारनाथ वन प्रभाग चमोली रजत सुमन ने बताया कि सड़क प्रस्ताव को लेकर कुछ बिंदुओं पर आपत्ति है। इन बिंदुओं में सुधार के संबंध में लोक निर्माण विभाग को पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा कि इसके बाद करीब एक माह के भीतर दोबारा संयुक्त निरीक्षण किया जाएगा।

रजत सुमन, उप वन संरक्षक, केदारनाथ वन प्रभाग

गैरसैंण से 26, भराड़ीसैंण से 41 किमी का सफर

गोगनाणी समेत आसपास के गांवों के ग्रामीणों के लिए सड़क सुविधा की स्थिति का अंदाजा दूरी से भी लगाया जा सकता है। ग्रामीणों के अनुसार गैरसैंण से गांव तक करीब 22 किलोमीटर सड़क मार्ग के बाद चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। इस तरह कुल दूरी करीब 26 किलोमीटर बैठती है।

वहीं, ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण से गांव की दूरी करीब 37 किलोमीटर सड़क मार्ग और इसके बाद चार किलोमीटर पैदल है। जिला मुख्यालय गोपेश्वर की दूरी करीब 116 किलोमीटर बताई जा रही है, जिसमें गांव से सड़क तक की पैदल दूरी भी शामिल है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की प्रक्रिया वर्षों से चल रही है। अब उनकी मांग है कि विभागीय आपत्तियों और औपचारिकताओं को जल्द पूरा कर सड़क निर्माण का रास्ता साफ किया जाए, ताकि किसी गंभीर मरीज को भविष्य में डोली के सहारे कई किलोमीटर पैदल न ले जाना पड़े।

 

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