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पंजाब को नशा मुक्त, शांत और समृद्ध राज्य बनाने का आशीर्वाद चाहता हूं, पद या प्रतिष्ठा नहीं: राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया”

चेतना जागे तो जीवन की दिशा बदल जाती है, गुरु का कार्य शिष्य के भीतर ईश्वरीय स्वरूप को जगाना है: ‘सिद्धगुरुवर’ श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव

पंजाब को नशा मुक्त, शांत और समृद्ध राज्य बनाने का आशीर्वाद चाहता हूं, पद या प्रतिष्ठा नहीं: राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया”

राममेहर शर्मा
चंडीगढ़। ‘सिद्धगुरुवर’ श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव के दिव्य सान्निध्य में जीरकपुर स्थित पार्क प्लाज़ा में आयोजित ‘शक्ति चेतना उत्सव’ का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया व उनकी धर्मपत्नी अनीता कटारिया, हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, छत्तीसगढ़ के सांसद चिंतामणि महाराज तथा अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। विश्वधर्म चेतना मंच चंडीगढ़ की ओर से मुख्य अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया गया।ग श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव जी के आगमन पर उनका औपचारिक स्वागत किया गया तथा दिव्य ज्योति प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

‘शक्ति चेतना उत्सव’ के दौरान ‘सिद्धगुरुवर’ ने पंजाब के राज्यपाल का कार्यक्रम में पधारने पर हार्दिक अभिनंदन किया।कार्यक्रम में ईश्वरीय सत्ता से विभूषित, देवलोक से इस धरा पर अवतरित एक दिव्य सिद्ध आत्मा, इस संसार की संपूर्ण सिद्धियां से सुशोभित देवस्वरूप सिद्धेश्वर गुरुदेवजी के दर्शन और आशीर्वाद के लिए काफ़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे।

इस अवसर मुख्य अतिथि पंजाब के राज्यपाल महामहिम गुलाब चंद कटारिया और उनकी धर्मपत्नी अनीता कटारिया ने गुरुदेव को नमन करते हुए कहा कि उनके जीवन में जो भी सफलता मिली है, उसमें गुरुदेव के आशीष का विशेष योगदान है। राज्यपाल ने कहा कि पंजाब गुरुओं और बलिदान की पवित्र भूमि है, लेकिन आज नशे जैसी गंभीर समस्या समाज को खोखला कर रही है। उन्होंने विनती की कि गुरुदेव ऐसा आशीर्वाद दें जिससे पंजाब नशा मुक्त होकर आनंद और सौहार्द के साथ आगे बढ़ सके।

उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मैं पद, प्रतिष्ठा या धन नहीं चाहता। बस यह आशीर्वाद चाहता हूं कि मैं अपने प्रदेश के लिए ऐसा काम कर सकूं जिससे पंजाब खुशहाल बने। यहां की माताओं और बहनों की पीड़ा को देखकर मन व्याकुल हो जाता है। आपका आशीर्वाद रहेगा तो हम इस चुनौती को जरूर पार करेंगे।”

इसके बाद ‘सिद्धगुरुवर’ श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव
ने अपने आशीर्वचन में कहा कि दुनिया को आज केवल धर्म का ज्ञान नहीं, बल्कि धर्म की चेतना की जरूरत है। गुरुजी ने समझाया कि गुरु केवल शब्द नहीं देता, वह शिष्य के भीतर सोई ईश्वरीय शक्ति को जगाता है। उन्होंने कहा कि उनका संकल्प है कि हर शिष्य आत्मनिर्भर, जागरूक और समाज के लिए उपयोगी बने।

गुरुदेव ने बताया कि भौतिकता की तेज रफ्तार में मनुष्य थक चुका है और ऐसे समय में गुरु ही मन को दिशा और विश्रांति प्रदान करता है। उनका कहना था कि यह युग सिर्फ विज्ञान का नहीं है, इसे विवेक के साथ जीना होगा। विज्ञान सत्य की खोज करता है और धर्म उस सत्य के अनुभव को पूर्ण करता है।

एक बार मंच भावनाओं से भर उठा जब गुरुदेव ने माता-पिता के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मां जीवन देती है और पिता उस जीवन को आकार देते हैं। उनकी सुनाई गई कविता ने पूरे सभागार को भावुक कर दिया।उन्होंने धर्म और विज्ञान के संबंध पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि दोनों मानवता को आगे ले जाने वाली शक्तियां हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गुरु शिष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। जब चेतना जागती है तो जीवन की दिशा बदल जाती है और भटकाव समाप्त हो जाता है।

गुरुदेव ने आगे कहा कि अपने जीवन को योग, प्राणायाम और ध्यान से संतुलित रखना जरूरी है।अपनी खूबियों को पहचानो और शक्ति के साथ आगे बढ़ो। तुम सब अद्वितीय हो, अपने आप में एक मास्टरपीस हो।उन्होंने सफलता का वास्तविक अर्थ समझाते हुए कहा कि सफलता का मतलब पद या धन नहीं है। अगर आपकी मौजूदगी से यह दुनिया सुंदर होती है, तो आप सफल हैं। आपकी दुनिया आपके शरीर से शुरू होती है और परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व तक फैलती है।

गुरुदेव ने निंदा और नकारात्मकता से बचने की सलाह दी। “व्यर्थ बातें आपके भीतर नकारात्मक ऊर्जा पैदा करती हैं। अच्छा बोलना और आशीर्वाद देना सीखो। जीवन में शांति और अहिंसा की राह अपनाओ। रिश्तों में संतुलन रखो और किसी भी संबंध में गांठ मत आने दो। अच्छाई, व्यवहार, सदगुण और खुशी जीवन का अमृत है, जबकि निंदा, घृणा और नफरत विष है।”

उन्होंने कहा कि अपने आचरण में अच्छाइयां शामिल कर लोगे तो जीवन उत्सव बन जाएगा। “अपने आप से प्रेम करना सीखो। तुम्हें परिवार से परमात्मा तक की यात्रा तय करनी है।” कार्यक्रम के अंत में पूरा वातावरण भक्ति, ऊर्जा और सकारात्मक भावनाओं से भर गया। श्रद्धालु गुरुदेव के दिव्य वचनों से प्रभावित होकर नई सोच और नई चेतना के साथ लौटे।

विश्वधर्म चेतना मंच, ब्रह्मर्षि आश्रम, तिरुपति के राष्ट्रीय संयोजक भूपेंद्र जैन, चंडीगढ़ केंद्र के अध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने कार्यक्रम की सफलता के लिए उपस्थित गणमान्य अतिथियों और गुरुभक्तो का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विश्वधर्म चेतना मंच, ब्रह्मर्षि आश्रम, तिरुपति के ग्लोबल महिला चेयरपर्सन सरला बोथरा, डीजीपी आरसी मिश्रा आईपीएस, एसीएस राजीव रंजन आईएएस, न्यायाधीश नवाब सिंह, विश्वधर्म चेतना मंच हरियाणा अध्यक्ष संजय शर्मा, राजनीतिक सचिव तरुण भंडारी, गुरुभक्त भूपेंद्र शर्मा, अतुल कपूर, अजय नागपाल, संजय बिश्नोई, प्रवीण गुप्ता, भाग सिंह, सुंदर लाल अग्रवाल एवं विनय जैन आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

फोटो कैप्शन: 1. चंडीगढ़ के जीरकपुर स्थित पार्क प्लाज़ा में आयोजित ‘शक्ति चेतना उत्सव’ में उपस्थित भक्तजनों को संबोधित करते हुए ‘सिद्धगुरुवर’ श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव।

फोटो कैप्शन: 2 .चंडीगढ़ के जीरकपुर स्थित पार्क प्लाज़ा में आयोजित ‘शक्ति चेतना उत्सव’ में ‘सिद्धगुरुवर’ श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव का सम्मान करते हुए आयोजक।

फोटो कैप्शन: 3 .चंडीगढ़ के जीरकपुर स्थित पार्क प्लाज़ा में आयोजित ‘शक्ति चेतना उत्सव’ में कार्यक्रम में उपस्थित पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया व उनकी धर्मपत्नी अनीता कटारिया, हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, छत्तीसगढ़ के सांसद चिंतामणि महाराज।

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