Uttarakhand

उत्तराखंड में GST का बड़ा एक्शन, 150 करोड़ की चोरी का खुलासा

उत्तराखंड में अब तक की सबसे बड़ी जीएसटी कार्रवाई में विशेष जांच शाखा (SIB) ने एक बड़े औद्योगिक समूह के खिलाफ जबरदस्त शिकंजा कसते हुए करीब 150 करोड़ रुपये की कर चोरी का खुलासा किया है। ट्रांसफॉर्मर और उससे जुड़े कारोबार में सक्रिय इस ग्रुप पर हुई छापेमारी ने टैक्स चोरी के संगठित खेल को उजागर कर दिया।

छापे के दौरान मौके पर ही वसूले गए 20 करोड़

आयुक्त राज्य कर सोनिका के निर्देश पर करीब 08 घंटे चली इस कार्रवाई में अधिकारियों ने फैक्ट्री से ही 19.83 करोड़ रुपये जीएसटी जमा कराए। साथ ही 76 करोड़ रुपये से अधिक का स्टॉक सीज कर दिया गया, जिसे अब जांच पूरी होने तक हटाया नहीं जा सकेगा।

‘निल’ रिटर्न के पीछे छिपा करोड़ों का कारोबार
जांच में सामने आया कि कंपनी ने डिमर्जर के बाद पुराने यूनिट को कागजों में निष्क्रिय दिखा दिया, लेकिन असल में वही यूनिट देशभर से माल खरीदकर सप्लाई कर रही थी। हैरानी की बात यह रही कि पिछले 6-7 महीनों में 150 करोड़ से ज्यादा की खरीद के बावजूद जीएसटी पोर्टल पर लगातार ‘निल’ रिटर्न दाखिल किए गए।

देशभर में फैला था सप्लाई नेटवर्क
तमिलनाडु, महाराष्ट्र और दमन-दीव से माल मंगाकर उसे उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र तक भेजा जा रहा था। बैंक खातों में भारी लेनदेन हो रहे थे, लेकिन कागजों में कारोबार शून्य दिखाया जा रहा था।

सरकारी टेंडरों में भी खेल के संकेत
जांच में यह भी सामने आया कि बिजली वितरण निगमों और ऊर्जा विभागों को सप्लाई के दौरान कागजों में कीमत बढ़ाकर दिखाने का खेल हुआ। फैक्ट्री से बड़ी संख्या में फर्जी बिल भी बरामद किए गए हैं।

AI और डेटा एनालिसिस से खुला पूरा खेल

इस बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करने के लिए विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस सॉफ्टवेयर और विभिन्न सरकारी डाटाबेस का इस्तेमाल किया। यहां तक कि एक डमी कंपनी बनाकर भी सूचनाएं जुटाई गईं। करीब एक महीने की निगरानी के बाद कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

इन संकेतों से गहराया शक

डिमर्जर के बाद भी संदिग्ध गतिविधियां, असामान्य बैंक लेनदेन, स्टॉक में अंतर, लंबी दूरी तक तेजी से माल ढुलाई और परिवहन के वीडियो साक्ष्य, इन सभी ने जांच एजेंसियों को अलर्ट कर दिया।

32 अफसरों की टीम ने मारा सटीक छापा

पूरी कार्रवाई जीएसटी आयुक्त सोनिका सिंह के नेतृत्व में की गई। संयुक्त आयुक्त रोशन लाल और अपर आयुक्त राकेश वर्मा के निर्देशन में 32 अधिकारियों की टीम ने तीन हिस्सों में बंटकर ऑपरेशन को अंजाम दिया।

जांच जारी, बड़े नाम आ सकते हैं सामने
फिलहाल विभाग ने कंपनी और निदेशकों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।

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