उत्तराखण्ड: विवाह पंजीकरण में 24 गुना वृद्धि — यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तराखण्ड
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में समान नागरिक संहिता लागू कर उत्तराखण्ड ने रचा इतिहास, छह माह में तीन लाख से अधिक विवाह पंजीकरण
देहरादून, जनवरी 2026 (सू. ब्यूरो)
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर एक ऐतिहासिक मिसाल पेश की। इस कानून के लागू होने के बाद राज्य में विवाह पंजीकरण में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पुराने अधिनियम की तुलना में अब विवाह पंजीकरण की दैनिक औसत संख्या में 24 गुना वृद्धि हुई है। यूसीसी लागू होने के बाद प्रतिदिन औसतन 1,634 विवाह पंजीकरण हो रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या केवल 67 प्रतिदिन थी। जनवरी 2025 से जुलाई 2025 तक के छह महीनों में ही तीन लाख से अधिक विवाह पंजीकरण दर्ज किए गए हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू करने का संकल्प लिया था, जिसे सत्ता में आने के बाद उन्होंने पहली कैबिनेट बैठक में ही मूर्त रूप दिया। विस्तृत जनमत संग्रह और कानूनी औपचारिकताओं के बाद 27 जनवरी 2025 से राज्य में यूसीसी कानून लागू कर दिया गया।
मुख्यमंत्री धामी का यह निर्णय सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समान अधिकारों की दिशा में एक साहसिक और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यूसीसी कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों — विशेष रूप से महिलाओं — को समान अधिकार और सम्मान प्रदान करना है।
इस कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और अन्य पारिवारिक प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके तहत महिलाओं और पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु निर्धारित, तलाक और अन्य प्रक्रियाओं में समान एवं सख्त प्रावधान किए गए हैं। यूसीसी के लागू होने से बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं पर भी रोक लगी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा,
“उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू करना राज्य सरकार का ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय है। इसका उद्देश्य किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार, समान अवसर और समान सम्मान देना है। विवाह पंजीकरण में आई अभूतपूर्व वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि जनता ने इस कानून को पूरे मन से स्वीकार किया है और इसे सामाजिक सुधार के रूप में देखा है। उत्तराखण्ड ने पूरे देश को एक नई दिशा दी है, और मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाएंगे।”
उत्तराखण्ड की यह पहल न केवल कानूनी और सामाजिक सुधार का उदाहरण बनी है, बल्कि “एक भारत–समान अधिकार” की दिशा में भी एक प्रेरणादायक कदम है।



