Uttarakhand

बद्री-केदार मंदिर समिति में हेमंत द्विवेदी और बीडी सिंह की नियुक्ति की चर्चा, विवाद भी गरमाए

पूर्व में गड़बड़ी के आरोपों से घिरे हेमंत द्विवेदी और बीडी सिंह की नियुक्ति पर सवाल, बद्री-केदार समिति में उठी नई बहस

उत्तराखंड। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में अध्यक्ष पद पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हेमंत द्विवेदी और उपाध्यक्ष पद पर मुख्यमंत्री के सलाहकार बीडी सिंह की संभावित नियुक्ति की चर्चाओं के बीच विवाद भी खड़ा हो गया है। जहां एक ओर इन नामों पर चर्चा तेज है, वहीं दूसरी ओर दोनों की नियुक्तियों को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं।

हेमंत द्विवेदी की नियुक्ति पर उठे सवाल

हल्द्वानी के कारोबारी हेमंत द्विवेदी पूर्व में तराई बीज विकास निगम के अध्यक्ष रह चुके हैं, लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान निगम में अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं। इन आरोपों की जांच के लिए प्रदेश सरकार ने रिटायर्ड आईएएस अधिकारी भाटी की अध्यक्षता में एक जांच आयोग गठित किया था।

भाटी आयोग की रिपोर्ट में हेमंत द्विवेदी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई थी, लेकिन इस फाइल के शासन से गायब हो जाने की बात सामने आई। हाल ही में जब यह मामला सूचना आयोग पहुंचा, तो सूचना आयोग ने प्रदेश सरकार को फिर से फाइल तैयार करने और जांच पूरी करने के निर्देश दिए। अब ऐसे व्यक्ति की बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति की चर्चाओं ने नए विवाद को जन्म दे दिया है।

बीडी सिंह की नियुक्ति पर नियमों की अनदेखी का आरोप

मंदिर समिति के उपाध्यक्ष पद के लिए चर्चा में आए बीडी सिंह का कार्यकाल भी विवादों से भरा रहा है। वह लगभग 10 वर्षों तक बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) के रूप में कार्यरत रहे।

नियमानुसार, कोई भी अधिकारी या कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर अधिकतम तीन वर्षों तक ही कार्य कर सकता है। विशेष परिस्थितियों में शासन इसकी अवधि 5 वर्ष तक बढ़ा सकता है, लेकिन बीडी सिंह ने सभी नियमों को ताक पर रखकर 10 साल से अधिक समय तक इस पद पर काम किया।

राजनीतिक रूप से उनका कार्यकाल भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही सरकारों में बना रहा। लेकिन जब मंदिर समिति से उनके सीईओ पद से हटाया गया, तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें अपना चारधाम यात्रा सलाहकार नियुक्त कर दिया।

हिंदू योग्यता को लेकर भी उठ सकते हैं सवाल

बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम के अनुसार, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति के लिए हिंदू होना अनिवार्य है। लेकिन बीडी सिंह भोटिया समाज से आते हैं, जिसके चलते उनकी नियुक्ति भी विवादों में घिर सकती है।

अब देखना होगा कि क्या सरकार इन नियुक्तियों पर आधिकारिक मुहर लगाती है, या फिर बढ़ते विरोध और विवादों के चलते इस पर पुनर्विचार किया जाता है।

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