खटीमा में वक्फ संपत्तियों को लेकर विवाद गहराया, आय के हिसाब से लेकर दुकानों के हस्तांतरण तक उठे सवाल

शिकायतकर्ता ने एसडीएम से की जांच और विशेष ऑडिट की मांग, वर्तमान प्रशासक ने आरोपों को बताया साजिश; प्रशासन दस्तावेजों की जांच में जुटा
खटीमा। खटीमा में वक्फ संख्या 137 और 138, जामा मस्जिद एवं मदरसा रहमानिया से जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वक्फ संपत्तियों से होने वाली कथित आय, दुकानों के हस्तांतरण और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर शिकायत प्रशासन तक पहुंची है। वहीं, वर्तमान प्रशासक ने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को साजिश बताते हुए सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। मामले में प्रशासन का कहना है कि दोनों पक्षों के दस्तावेज और दावे जांचे जा रहे हैं तथा तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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कथित आय के हिसाब को लेकर सवाल
गौटिया निवासी जावेद रजा ने एसडीएम खटीमा को दिए ज्ञापन में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि चंदे और दुकानों के किराये से करीब 1.50 लाख रुपये प्रतिमाह की आय होती है। उन्होंने इस आय का पारदर्शी हिसाब उपलब्ध कराने और पिछले तीन वर्षों का विशेष ऑडिट कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ता के अनुमान के अनुसार तीन वर्षों में यह राशि करीब 54 लाख रुपये हो सकती है। हालांकि, यह आंकड़ा शिकायत में किए गए अनुमान पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। वास्तविक आय, खर्च और वित्तीय स्थिति का पता संबंधित अभिलेखों और ऑडिट की जांच के बाद ही चल सकेगा।
पांच दुकानों के कथित हस्तांतरण पर भी सवाल
शिकायत में वक्फ संपत्ति पर स्थित करीब पांच दुकानों के कथित हस्तांतरण का मुद्दा भी उठाया गया है। आरोप है कि इन दुकानों को बिना सार्वजनिक सूचना के अन्य लोगों को हस्तांतरित किया गया। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि दुकानों के आवंटन या हस्तांतरण के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई और संबंधित आदेश किस स्तर से जारी हुए।
मामले में दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दुकानों के संबंध में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
वर्तमान प्रशासक ने आरोपों को बताया साजिश
दूसरी ओर, वर्तमान प्रशासक कामिल खान ने भी एसडीएम को पत्र देकर अपना पक्ष रखा है। उनका दावा है कि 30 जुलाई 2026 को उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की ओर से तत्कालीन प्रबंधक कमेटी के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। कामिल खान का आरोप है कि इस कार्रवाई के बाद कुछ लोग उनसे नाराज हैं और उनकी सामाजिक छवि खराब करने के लिए उनके खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।
कामिल खान ने अपनी जान को खतरा होने की आशंका भी जताई है और कथित तौर पर उनके खिलाफ हमले की साजिश की आशंका व्यक्त की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक तस्वीर
मामले को लेकर अब मुख्य सवाल वक्फ संपत्तियों की आय-व्यय, दुकानों के प्रबंधन और पूर्व एवं वर्तमान प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर है। प्रशासनिक जांच में यह देखा जाएगा कि संपत्तियों से कितनी आय हुई, उसका उपयोग किन मदों में किया गया, दुकानों के हस्तांतरण के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई और संबंधित आदेश व रिकॉर्ड क्या कहते हैं।
एसडीएम खटीमा तुषार सैनी के अनुसार, प्रशासन संबंधित आदेशों एवं दस्तावेजों का अध्ययन कर रहा है। दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आरोपों के बीच अब रिकॉर्ड पर टिकी नजर
वक्फ संपत्तियों को लेकर सामने आए आरोपों के बाद मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में है। एक पक्ष जहां आय और संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष खुद को साजिश का शिकार बता रहा है।
फिलहाल किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। वक्फ संपत्तियों की आय, दुकानों के हस्तांतरण और प्रबंधन से जुड़े वास्तविक तथ्यों का खुलासा दस्तावेजी जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही हो सकेगा।



