बजरंग सेतु पर कांच के फुटपाथ के लिए बन रही नई व्यवस्था, टिकट लेकर मिलेगा प्रवेश

देहरादून।
ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला के विकल्प के रूप में तैयार किए गए बजरंग सेतु के संचालन को लेकर लोक निर्माण विभाग नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर रहा है। इसके तहत पुल के कांच वाले फुटपाथ पर प्रवेश के लिए शुल्क निर्धारित किए जाने की तैयारी है, जबकि पुल का सामान्य हिस्सा आम लोगों की आवाजाही के लिए पहले की तरह खुला रहेगा। कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा कारणों से कांच वाले हिस्से को पूरी तरह बंद रखा जाएगा।
करीब 69.20 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 132.30 मीटर लंबे इस आधुनिक सस्पेंशन ब्रिज को पर्यटन और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पुल के दोनों ओर पांच परतों वाले टफेंड ग्लास से बने पारदर्शी फुटपाथ इसकी प्रमुख विशेषता हैं, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे।


सुरक्षा और निगरानी पर विशेष फोकस
निर्माण के दौरान कई बार कांच को नुकसान पहुंचने की घटनाओं के बाद विभाग सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में जुटा है। पुल पर सीसीटीवी कैमरे, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और नियमित निगरानी की व्यवस्था की जा रही है। SOP में यह भी तय होगा कि कांच वाले हिस्से में एक समय में कितने लोगों को प्रवेश मिलेगा और रखरखाव की व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
कांवड़ यात्रा में रहेगा प्रतिबंध
लोक निर्माण विभाग के अनुसार कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए कांच वाले फुटपाथ पर आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। श्रद्धालु केवल पुल के सामान्य मार्ग का ही उपयोग कर सकेंगे।
पर्यटन को मिलेगा नया आकर्षण
बजरंग सेतु को आधुनिक तकनीक के साथ इस तरह विकसित किया गया है कि यह केवल आवागमन का साधन नहीं बल्कि ऋषिकेश का नया पर्यटन आकर्षण भी बने। पुल से गुजरते हुए पर्यटक गंगा और आसपास की पर्वतीय वादियों का मनोरम दृश्य देख सकेंगे।
टिकट व्यवस्था से होगा संचालन
लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडे ने बताया कि दुनिया के कई देशों में इस तरह के कांच वाले आकर्षण स्थलों पर टिकट व्यवस्था लागू है। इसी तर्ज पर बजरंग सेतु के कांच वाले हिस्से के लिए भी प्रवेश शुल्क निर्धारित किया जा सकता है, जिससे भीड़ नियंत्रण के साथ-साथ रखरखाव और संचालन की व्यवस्था भी बेहतर ढंग से की जा सके।
पुराने लक्ष्मण झूले का विकल्प
सुरक्षा कारणों से पुराने लक्ष्मण झूला को बंद किए जाने के बाद इस नए पुल का निर्माण वर्ष 2022 में शुरू किया गया था। अब इसके संचालन के लिए स्पष्ट नीति बनाई जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित एवं व्यवस्थित अनुभव मिल सके।



