गोरखा समाज की वीरता और राष्ट्रभक्ति पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत: सीएम धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को गढ़ी कैंट स्थित महिंद्रा ग्राउंड में वीर गोरखा कल्याण समिति की ओर से आयोजित गोरखा दशैं-दीपावली महोत्सव एवं राजकीय मेले में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने गोरखा समाज के लोगों को दशैं और दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गोरखा समाज की वीरता, शौर्य, त्याग और राष्ट्रभक्ति पर पूरे देश को गर्व है। गोरखा समाज केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे भारत का गौरव है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखा समाज का इतिहास अदम्य साहस और बलिदान की गौरवगाथाओं से भरा हुआ है। देश की सीमाओं की रक्षा में गोरखा वीरों ने हमेशा अद्वितीय शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया है। उनका आदर्श वाक्य ‘कायर हुनुभन्दा मर्नु राम्रो’ यानी कायर बनकर जीने से बेहतर वीरता के साथ प्राण न्योछावर करना, उनके साहस और स्वाभिमान को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि गोरखा समाज ने सैन्य सेवाओं के साथ ही उत्तराखंड के निर्माण और विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
धामी ने कहा कि दशैं और दीपावली जैसे पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकजुटता के प्रतीक हैं। दशैं जहां अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है, वहीं दीपावली अंधकार पर प्रकाश और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के संबंध केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सदियों पुराने सांस्कृतिक, सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों पर आधारित हैं। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का संबंध इसकी मिसाल है। राज्य सरकार गोरखा समाज की भाषा, कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी में नेपाली भाषा के डिप्लोमा और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही नेपाली भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए नेपाली अकादमी को उत्तराखंड भाषा संस्थान के दायरे में लाने की पहल की गई है।
मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तीकरण के लिए संचालित योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया है। प्रदेश में तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जो परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बना है, जो महिलाओं को समान अधिकार और न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सीमांत क्षेत्रों के विकास पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार इन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, व्यापार और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दे रही हैं। भारत-नेपाल सीमा पर महाकाली नदी पर प्रस्तावित पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई और क्षेत्रीय विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण है। वहीं, पिथौरागढ़ के धारचूला क्षेत्र में छारछुम पुल परियोजना से दोनों देशों के बीच आवागमन और व्यापारिक संपर्क मजबूत होगा।
उन्होंने बताया कि बनबसा में 368 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत से एकीकृत चेक पोस्ट का निर्माण किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र में ड्राई पोर्ट विकसित करने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं। इसके अलावा भारतमाला परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-9 पर सितारगंज-टनकपुर मार्ग से बनबसा स्थित भारत-नेपाल सीमा तक 246 करोड़ 86 लाख रुपये की लागत से चार लेन कनेक्टिविटी विकसित की जा रही है। इन परियोजनाओं से सीमांत क्षेत्रों में व्यापार, परिवहन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखा समाज की सहभागिता और सहयोग से उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। राज्य सरकार समाज के सम्मान, विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी। इस दौरान कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, वीर गोरखा कल्याण समिति के पदाधिकारी, गोरखा समाज के गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।



