उत्तराखंड में बारिश का कहर: पिथौरागढ़ में 18 और बागेश्वर में 16 सड़कें बंद, टिहरी में रिंग रोड का पुश्ता क्षतिग्रस्त

पिथौरागढ़/टिहरी गढ़वाल। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के पूर्वानुमान के मुताबिक प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। पिथौरागढ़ और बागेश्वर में बारिश व भूस्खलन के चलते कई सड़कें बंद हो गई हैं, जबकि टिहरी में निर्माणाधीन जाख-डोबरा रिंग रोड का पुश्ता क्षतिग्रस्त होने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
पिथौरागढ़ में 18 सड़कें बंद
सीमांत पिथौरागढ़ जिले में लगातार बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन और मलबा आने से 18 मोटर मार्ग बंद हो गए हैं। इससे कई ग्रामीण क्षेत्रों का जिला और तहसील मुख्यालयों से संपर्क प्रभावित हुआ है। बंद मार्गों के कारण यात्रियों के साथ मरीजों और जरूरी काम से आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


चीन सीमा को जोड़ने वाले मार्ग भी बारिश से प्रभावित हुए हैं। कई स्थानों पर मलबा आने के कारण घंटों यातायात बाधित रहा। लोक निर्माण विभाग और संबंधित एजेंसियां मशीनों की मदद से बंद सड़कों को खोलने में जुटी हैं।
प्रशासन ने मौसम को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने और अनावश्यक रूप से जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है। 5 सितंबर को स्कूल बंद रखने की सूचना भी जारी की गई है।
पिथौरागढ़ में प्रभावित प्रमुख मार्ग: घारचूला-तवाघाट, तवाघाट-गुंजी, ड्योरा-बारमू, जौलजीबी-झूलाघाट, सोबला-उमचिया, होकरा-नामिक, एलागाड़-जुम्मा, घापाबैंड-बुई-पातों, बांसबगड़-कोटा, मदकोट-दारमा, जैती-घोरपट्टा समेत 18 मोटर मार्ग।
बागेश्वर में 16 मार्ग बंद, एंबुलेंस भी फंसी
बागेश्वर जिले में बारिश और भूस्खलन के कारण एनएच-109 समेत 16 मोटर मार्ग बंद हो गए हैं। रवाईखाल क्षेत्र में सड़क बंद होने से एंबुलेंस, बस और टैक्सी समेत कई वाहन घंटों तक फंसे रहे। मरीज को बैजनाथ ले जा रही एक एंबुलेंस भी करीब डेढ़ घंटे तक जाम में फंसी रही।
सड़क विभाग के कर्मचारी और मशीनें मलबा हटाकर यातायात बहाल करने में जुटे हैं। प्रशासन ने लोगों से मौसम खराब रहने के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
टिहरी में पहली बारिश में रिंग रोड का पुश्ता धंसा
टिहरी गढ़वाल में लगातार बारिश के बीच निर्माणाधीन जाख-डोबरा रिंग रोड के तहत बनाया गया पुश्ता क्षतिग्रस्त हो गया। पुश्ते का हिस्सा टूटने और धंसने के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया होता तो शुरुआती बारिश में ही पुश्ते की ऐसी स्थिति नहीं बनती। उन्होंने संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्था से पुश्ते की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त हिस्से की महज औपचारिक मरम्मत के बजाय निर्धारित मानकों के अनुसार दोबारा मजबूत निर्माण कराने की मांग की। उनका कहना है कि रिंग रोड क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है और निर्माण में किसी भी तरह की लापरवाही भविष्य में सड़क की सुरक्षा के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी परेशानी का कारण बन सकती है।



